खवाब सा 😇

शुभ प्रभात

हमने रात को एक चित्र बनाया
नींद तो आती नहीं
तो बातें करने लगा इन्हीं से
पहले तो ख़ामोश रहीं
बड़ी कोशिश करने के बाद बोलीं
“ तुम मुहब्बत करते हो ?
तो मज़बूर क्यों कर रहे हो
मुहब्बत में तो धड़कनें सुनी जाती हैं”
और हवा का एक झोंका आया
न जाने कब वह चित्र मुझसे लिपट गया
सुबह आँख खुली
वह मुझसे लिपटा, मुड़ा तुड़ा पड़ा था।

3 thoughts on “खवाब सा 😇

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