🙏HAPPY WOMEN’S DAY🙏

स्त्री पाठशाला है ।

स्त्री धन नहीं है ।
ना सम्पति और अधिकार है ।
स्त्री सृजन है धरा की
और अनंत प्यार है ॥

स्त्री पाठशाला है ।
कत्तर्व्य की वर्णमाला है ॥
रिश्तों के है अनेक कक्ष –
सच्चाई के है बोधिवृक्ष ॥

स्त्री है ज्ञान ।
सृष्टि को समझने का
जीवन एक खेल
रोने – हसने का ॥

स्त्री है
एकलव्य जैसा दान ।
जैसे
गुरु दक्षिणा महान ॥

धरती सा धैर्य हो या
लज्जा के आभूषण ।
स्त्री श्रृंगार है जीवन का ।
गृहस्थ तप है सबसे बड़ा
युगदृष्टि है चंचल मन का ॥

स्त्री कत्तर्व्य के बांस पर
नटनी बन कर
दिखाती है दिनभर करतब
और
सम्मान के पात्र में मांगती है
मां बहन बेटी की सुरक्षा
जैसी कालजयी मुद्रा ॥

स्त्री महकाती है ।
रिश्तों की बगिया और
निभाती है वो
दोनों कुलों की मर्यादा ।
रोपती है प्यार के पौधे
कल्पवृक्ष की अभिलाषा में ।
सत्यम शिवम सुन्दरम्
जींवत करती है अनंत परिभाषा में

है अपने देश की संस्कृति
गंगा जैसी पावन ।
राम से पहले सीता और
किशन के पूर्वाद्ध
राधा का उच्चारण
है धरा पर स्त्री को सम्मान ।
ऐसी मातृभूमि को
शत – शत प्रणाम ॥

संवादी है हम मातृभाषा के ।
पितृऋण से बड़ा है मातृऋण
इसलिए
कोटिश आभार स्त्रीजात का
प्रकृत्ति की सुन्दर सौगात का ॥
है वन्दन , अभिनंदन ।
वन्दे ! मातरम् – – I 🌹🙏🌹

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